खबर का बड़ा असर : खबर वाणी पर प्रमुखता से चलाई गई खबर का स्वास्थ्य विभाग ने लिया संज्ञान, कई अस्पतालों पर की गई सीलिंग की कार्रवाई
मामला बिगड़ने पर अधिकारी करते है कार्यवाही! अकेले जानसठ में ही आधा दर्जन से अधिक अस्पताल सील, आखिर किसके इशारे पर जिले भर में चल रहे बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल, आये दिन ऐसे अस्पतालो में महिलाओं की हो रही मौत

खबर वाणी /भगत सिंह
मुज़फ्फरनगर/जानसठ। खबर उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर से है जहां जिलेभर में कुकरमुत्तों की तरह खुले बिना रजिस्ट्रेशन एवं झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा गली मोहल्लो में अस्पताल आजकल सुर्ख़ियो में है। इन अस्पतालों में आए दिन महिलाओं की मौत के मामले भी यदा-कदा सामने आ रहे हैं, अगर बात बीती देर रात की करें तो यहां मुजफ्फरनगर के ही जानसठ कस्बे में स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में एक महिला की मौत का मामला सामने आया है। हालांकि बीती देर रात महिला के परिजनों द्वारा हंगामा प्रदर्शन किया गया जिसके बाद पुलिस को भी मौके पर पहुंचना पड़ा।
और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अगर पीड़ित परिवार कोई तहरीर देता है तो कार्रवाई की जाएगी। वही मामला सोशल मीडिया की सुर्खियों में बना तो दिन निकलने से लेकर दोपहर तक स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों की टीम ने जानसठ कस्बे में जाकर आधा दर्जन से अधिक बिना रजिस्ट्रेशन और बिना मानको के चलाये जा रहे अस्पतालों पर कार्यवाही करते हुए ऐसे अस्पताल सील किये है।
दुनियां भर में डॉक्टर को धरती का भगवान कहा जाता है लेकिन मुजफ्फरनगर में इसका उल्टा ही असर देखने को मिल रहा है मुजफ्फरनगर के प्राइवेट हॉस्पिटलो में गलत उपचार के कारण आए रोज हो रही मौतो से अब लोगो का डॉक्टरो से विश्वास उठ गया है इलाज के नाम पर लोगो से मोटी रकम वसूलने के बाद भी अस्पतालों मे मौत हो रही है कारण मुजफ्फरनगर मेंअनट्रेंड डॉक्टरो द्वारा इलाज किये जा रहे हैं।
मामला कस्बा जानसठ का है जहाँ पर गलत उपचार के कारण बीती देर रात्रि महिला की मौत हो गयी हालांकि कुछ दलालो द्वारा देर रात्रि इस पुरे मामले मे समझौता करा दिया गया लेकिन बड़ा सवाल यह है की आखिर स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा बिना मानकों के चल रहे अस्पतालो व क्लीनिको पर कोई ठोस कर्यवाही क्यों नहीं की जाती है ।
जिले भर में पिछले अगर 1 महीने की बात करें तो पिछले एक महीने में जनपद मुजफ्फरनगर के प्राइवेट हॉस्पिटलों के अंदर 50 से भी ज्यादा मौत हो चुकी है पीड़ित लोग शोर शराबा हो हल्ला कर थक हार कर बैठ जाते हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा कोई उचित कार्रवाई इन अस्पतालों पर नहीं की जाती।
यहां कार्रवाई के नाम पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा खाना पूर्ति ही की जाती है इस तरह के अस्पताल एक-दो दिन के लिए बंद करा दिए जाते हैं और उसके बाद नाम बदलवाकर उन्हें फिर से खुलवा दिया जाता है यानी स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों की मिली भगत से जनपद मुजफ्फरनगर में फर्जी अस्पतालों का यह गोरख धंधा खूब फल फूल रहा है ।
जनपद मुजफ्फरनगर के चरथावल में 20 से ज्यादा फर्जी अस्पताल संचालित है पुरकाजी में भी यही हाल है, बुढाना में 30 हॉस्पिल है और अगर सिटी की बात करें तो सिटी के अंदर 100 से भी ज्यादा बिना रजिस्ट्रेशन वाले क्लीनिक और अस्पताल संचालित है खतौली में भी दो दर्जन छोटे बड़े फर्जी अस्पताल चलाये जा रहे है जिन पर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से मेहरबान नजर आ रहा है।
ऐसा नहीं की स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से जनता द्वारा शिकायत न की जाती हो समाज सेवियों से लेकर हिंदू दलों के नेताओं द्वारा मुजफ्फरनगर जिलाधिकारी को मामले से अवगत कराते हुए ज्ञापन तक सोपे गए है लेकिन उसके बावजूद भी कोई कार्रवाई होती नजर नहीं आई जिस कारण लोगों को आए रोज अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा है।
मुजफ्फरनगर स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा अधिकारी की अगर बात करें तो मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा जनपद भर के प्राइवेट हॉस्पिटलों के संचालकों को सीएचसी प्रभारीयों द्वारा नोटिस जारी किए गए थे सूत्रों की माने तो नोटिस के नाम पर प्राइवेट अस्पताल संचालको से फील गुड़ कर मैहरबानी बरकरार रखी गयी है।
बकरा मार्किट में भी एक नीम हकीम का अस्पताल बन्द होने के बाद फिर से खुल गया है बताया जा रहा है कि इस डॉक्टर के पास तो कोई डिग्री और कोई रजिस्ट्रेशन नंबर भी नहीं है लेकिन बावजूद ईसके सुबह से शाम तक यहां सैकड़ो से ज्यादा मरीज अपना इलाज करते देखे जा सकते हैं।
वही अकेले कस्बा जानसठ में इस तरह खुले अस्पतालों की जब वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो दिन निकलने से लेकर दोपहर तक स्वास्थ्य विभाग की टीम कार्यवाही करती नजर आई जहा गत रात्रि जिस अस्पताल में महिला की मौत हुई थी उस अस्पताल समेत आधा दर्जन से अधिक अस्पतालों को सील किया गया है।
अब एक बड़ा सवाल कि जब अकेले जानसठ कस्बे में ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आधा दर्जन से अधिक बिना रजिस्ट्रेशन और बिना मानकों के चलाए जा रहे अस्पतालों को सील कर दिया गया है तो अगर जिला स्तर पर देखा जाए तो आखिर जिले स्तर पर कितने अस्पताल इस तरह चलाए जा रहे होंगे यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है।।