ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण हेतु ठोस कदम उठाने की सिकंदर यादव ने DM को पत्र लिखकर उठाई मांग
शहर में तेज़ आवाज़ वाले वाहन, डीजे और अनियंत्रित हॉर्न के कारण शोर स्तर लगातार खतरनाक

खबर वाणी संवाददाता
गाजियाबाद। एनसीआर का प्रमुख शहर गाजियाबाद जहाँ वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नगर निगम प्रयासरत है, वहीं ध्वनि प्रदूषण पर अब तक प्रभावी जागरूकता की कमी देखी जा रही है। शहर में तेज़ आवाज़ वाले वाहन, डीजे और अनियंत्रित हॉर्न के कारण शोर स्तर लगातार खतरनाक सीमा को पार कर रहा है। इसका दुष्प्रभाव न केवल नागरिकों पर बल्कि पक्षियों और पालतू पशुओं पर भी देखा जा रहा है।

समाजसेवी सिकंदर यादव ने इस गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी गाजियाबाद को एक पत्र लिखकर ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण हेतु ठोस कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख किया है।
ध्वनि प्रदूषण के प्रमुख कारण:
1. वाहनों द्वारा अनावश्यक हॉर्न बजाना, जिससे सड़कों पर लगातार शोर बढ़ रहा है।
2. सुबह कूड़ा संग्रह करने वाली गाड़ियों में तेज़ आवाज़ में बजाया जाने वाला संगीत, जिससे नागरिकों की नींद पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
3. शादी-विवाह और आयोजनों में देर रात तक बजने वाले डीजे, जिनकी आवाज़ इतनी तेज़ होती है कि कई बार घरों की खिड़कियों तक में कंपन उत्पन्न हो जाता है।
4. सड़कों पर झाड़ू लगने के दौरान उड़ने वाली धूल, जिससे वायु प्रदूषण और अस्थमा जैसी समस्याएँ बढ़ती हैं। पानी का छिड़काव करने से इसे रोका जा सकता है।
5. शहर के व्यापारिक प्रतिष्ठानों को सड़क किनारे घास लगाने के लिए प्रेरित करना, जिससे न केवल सुंदरता बढ़ेगी बल्कि धूल भी नियंत्रित होगी।
6. सड़क के सेंट्रल डिवाइडर पर हरियाली लगाने से भी शोर और धूल, दोनों में कमी आएगी।
7. अस्पताल, स्कूल और धार्मिक स्थलों के आसपास ‘नो हॉर्न ज़ोन’ लागू करने की मांग।
8. सप्ताह में एक दिन ‘नो हॉर्न डे’ मनाने का सुझाव, ताकि लोग अनावश्यक हॉर्न बजाने की आदत कम कर सकें।

सिकंदर यादव का कहना है कि यदि इन सुझावों को लागू किया जाए तो शहर के नागरिकों, छात्रों, बुजुर्गों और पक्षियों—सभी को बड़ी राहत मिल सकेगी। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि ध्वनि प्रदूषण को वायु प्रदूषण के समान गंभीरता से लेते हुए इसे नियंत्रित करने के कदम शीघ्र उठाए जाएं।




