17 देशों में जमी है भारतीय मोदी आर्मी की जड़ें, देश में मोदी लहर फिर से बनाने के प्रयास में जुटे राजीव आहूजा

खबर वाणी संवाददाता
मुजफ्फरनगर। माह दिसंबर में जहां देश में एक और ठंड चल रही है वहीं इस ठंड में दिल्ली के चारों और किसानों ने सब रास्तों पर अपनी मांगों को लेकर पड़ाव डाल रखा है। बुराडी तो मानों किसानों का तीर्थस्थल बन चुका है। जहां भाजपा को छोड़ देश के सब राजनीतिक दल किसानों के समर्थन में बुराड़ी पहुंच रहे हैं। वहीं भाजपा के लोग पसोपेश में हैं कि किस तरह किसानों को ये समझाया जाये कि कृषि बिल उनके लाभ का है। बैठकों का दौर चल जरुर रहा है लेकिन नतीजा जीरो ही निकल रहा है। ऐसी स्थिति में भाजपा के दिग्गज नेता घरों में घुसे बैठे हैं। हरियाणा व पंजाब में मोदी विरोध चरम सीमा पर पहुंच चुका है। समर्थन में यूपी, राजस्थान व महाराष्ट्र खुलकर सामने आ चुके हैं वहीं भारतीय मोदी आर्मी (बीएमए) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर राजीव आहूजा मोदी विरोधी इस लहर में स्तम्भ की तरह उनके पक्ष में ताबड़तोड़ प्रोग्राम कर रहे हैं जबकि भाजपा कार्यकर्ता चुप्पी साधे हुए हैं। कोविड-19 जागरूकता अभियान के चलते बीएमए तिरंगा यात्राओं के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रही है।
हाल ही की बीएमए की कन्नोज व इटावा में आयोजित हुई 47वीं तिरंगा यात्रा चर्चा का विषय बनी है। जहां राज्य सरकार ने बीएमए को यहां तिरंगा यात्रा निकालने की अनुमति दे दी है और सपा द्वारा प्रस्तावित रोड शो को अनुमति नहीं दी व साथ ही सपा के वाहन भी जब्त कर लिए। राज्य में चर्चा जोरों पर है कि कौन हैं डॉक्टर राजीव आहूजा व बीएमए जो यूपी में ताबड़तोड़ रैलियां तिरंगा यात्रा के माध्यम से कर रही है वह यूपी को मोदीमय बना रही है। बीएमए भाजपा का कोई प्रकोष्ठ व मोर्चा नहीं है बल्कि मोदी की नितियों व कार्यक्रमों को जन जन तक पहुंचाने का एक संगठन है। जिसको डॉक्टर राजीव आहूजा ने 15 वर्ष पूर्व गठित किया था। जिसमें 27 लाख से ज्यादा सक्रिय कार्यकर्ता जुड़े हैं। ये 17 देशों में भी कार्यरत हैं। विदित है कि ये संगठन नरेंद्र मोदी पीएम बनें इस बात का जनमत जुटाने में बड़ी भूमिका निभा चुका है। मोदी भक्त डॉक्टर राजीव आहूजा 17 देशों में मोदीवादी लोगों की एक बड़ी टीम का गठन कर उन्हें बीएमए के साथ जोड़े हुए हैं। शुरू में जो बीएमए पर तंज कसते थे आज वे डॉक्टर राजीव आहूजा के परिश्रम का लोहा मान चुके हैं।
बीएमए ने देश के पूर्वोत्तर राज्यों मणिपुर, नागालैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, असाम, जम्मू-कश्मीर, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब व हरियाणा में जबरदस्त पकड़ है और कहीं कहीं तो भाजपा से भी ज्यादा पकड़ बनाए हुए है। लक्ष्यद्वीप जैसे दीपों के समूह में बीएमए की टीम भाजपा से ज्यादा मजबूत हैं। इतने बड़े संगठन की न तो कोई फंडिंग करता है न ही इसे चुनाव में कोई दिलचस्पी होती है। राष्ट्रवाद व मोदीवाद का जामा पहने इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरे धीरे इस संगठन के माध्यम से देश के कौने कौने में फ़ैल चुके हैं। मोदी का जलवा बरकरार रखने में कोई कमी या कसर नहीं छोड़ रहे हैं। डॉक्टर राजीव आहूजा ने इस संगठन से जुड़ने वालों को निशुल्क इस संगठन से जोड़ा है।
कश्मीर के पुलवामा, पुंछ, राजौरी, उधमपुर, नगरोटा, सांभा, अनंतनाग व बांदीपुरा में सफल रोड शो करके आहूजा ने कश्मीरियों का दिल जीता है। कभी भाजपा से टिकट नहीं मांगी और न ही भाजपा ने उनकी सेवाओं को देखते हुए उन्हें संवैधानिक पद पर बैठाया है। सुभाष चंद्र बोस की भांति इस संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर राजीव पूरी दुनिया में मोदी का प्रचार कर रहे हैं। जो लोग भाजपा को सेक्युलर न मानते हुए मोदी के साथ जुडना चाहते हैं तो उन्हें बीएमए की छतरी के नीचे आना पड़ रहा है। बीएमए में 10 लाख से ज्यादा मुस्लिम जुड़े हुए हैं। जिन्हें भाजपा गले नहीं लगा रहा है।
इसी प्रकार लाखों ईसाई जो भाजपा व आरएसएस से दूरी बनाए हुए हैं वो बीएमए से जुडा हुआ है। डाक्टर आहूजा का इतना लंबा संघर्ष मोदी के लिए संभवत मोदी की नोलिज में हो या न हो ये तो कहना मुश्किल है परंतु देश में मोदी का एक ऐसा सहयोगी डॉक्टर राजीव आहूजा जिसने मोदी को पूरी दुनिया में मजबूत किया है लेकिन कभी खुद के लिए मोदी के पास नहीं गया। डाक्टर आहूजा के लाखों समर्थक चाहते हैं कि देश में रिक्त पड़े अनेक राज्यों के राज्यपाल के किसी भी राज्य के पद पर यदि डॉक्टर राजीव आहूजा को बैठा दिया जाता है तो उनकी मेहनत एक मिसाल बनेगी।
डाक्टर राजीव यूं तो 54 से 55 वर्ष के नेता हैं लेकिन युवाओं से भी ज्यादा सक्रिय हैं। 47 तिरंगा यात्राएं निकाल चुके हैं मगर उत्साह व ऊर्जा के ओतप्रोत हैं। अब जबकि किसानों ने देश में मोदी के खिलाफ वातावरण बना रखा है पानी जो खेत का उनकी आंखों से निकल रहा है व ठंड में पानी पीकर मोदी के खिलाफ अपना गुस्सा निकाल रहे हैं ऐसे में भाजपा और उनके सहयोगी धीरे धीरे भाजपा का साथ छोड़ रहे हैं। हरियाणा में तो खट्टर सरकार की चूलें हिल चुकी हैं। संघर्ष किसानों का लंबा खिंचा तो सरकार अल्पमत में आ जायेगी। भाजपा में मोदी विरोधी लोग भी मन ही मन खुश हो रहे हैं कि संभवत मोदी युग खत्म हो जाये व उनका नंबर लग जाये। उन द्वारा आरएसएस में अपनी गोटियां फिट करनी शुरू कर दी हैं।
इस संकट की घड़ी में मोदी को अपने संकटमोचनों को आगे लाना होगा व इस स्थिति में मुख्यमंत्रियों के समानांतर जो राज्यपाल नियुक्त हों वो मोदी भक्त यदि लग जाते हैं तो तख्ता पलट में मोदी विरोधी सीएम अपने मन की नहीं कर पायेंगे। नये राज्यपाल कब नियुक्त होंगे यह भविष्य के गर्भ में है किंतु जिन राज्यों में नये राज्यपाल लगने है उनमें मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, झारखंड, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा, पांडुचेरी, यूपी हैं। इन राज्यों में से किसी एक राज्य में मोदी भक्त डॉक्टर राजीव आहूजा की ताजपोशी हो सकती है ऐसा सुत्र बताते हैं।