किसान प्रदर्शन : 29 दिसंबर को फिर होगी सरकार से 3 मुद्दे पर वार्ता, बिल वापस नहीं तो घर वापस नहीं होगा किसान : राकेश टिकैत

खबर वाणी संवाददाता
दिल्ली। पिछले 31 दिनों से अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन पर बैठे किसानों ने एक बार फिर सरकार से बातचीत करने के लिए दिन और तारीख तय कर ली है। किसानों ने फैसला किया है कि वे सरकार के साथ 29 दिसंबर को सुबह 11 बजे तीन मुद्दों पर बातचीत करेंगे। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने खबर वाणी से बातचीत के दौरान यह भी साफ किया है कि अगर सरकार उनकी मांगे नहीं मानती और तीनों बिल वापस नहीं लेती हैं, तो किसान किसी भी सूरतेहाल में अपने घर वापस नहीं जाएगा। राकेश टिकैत ने कहा कि बिल वापस नहीं तो घर वापस नहीं, 29 दिसंबर को सरकार के सामने बातचीत के दौरान हम सिर्फ तीन मुद्दों पर अपनी बात रखेंगे, उन बातों को मानना या ना मानना सरकार के हाथ में है।
जब राकेश टिकैत से पूछा गया कि अगर सरकार उनकी आधी मांगे मान लेती हैं और आधी नहीं मानती, तो उस स्थिति में किसानों की क्या प्रतिक्रिया रहेगी। इस पर राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार को हमारी मांगे माननी ही होंगी अगर सरकार हमारी मांगें नहीं मानेगी तो हम अपने प्रदर्शन पर बैठे रहेंगे।
● 29 दिसंबर को इन तीन मुद्दों पर होगी बातचीत
◆ तीनों नई बिल सरकार वापस ले।
◆ सरकार MSP लागू करें ।
◆ स्वामीनाथन कमेटी लागू हो।
● 29 दिसंबर के बाद तय होगी आगे की रणनीति
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि आगे की रणनीति अभी तय नहीं है सब कुछ 29 दिसंबर की वार्तालाप पर ही निर्भर होगा, किसान की तरफ से 29 दिसंबर को सरकार के आगे तीन मांगें रखी जाएंगी। उन मांगों पर सरकार समधान निकलेगी या नहीं निकलेगी ये सरकार पर निर्भर करता है। समाधान निकालना किसान के हाथ में नहीं है, समाधान सरकार निकालेगी. किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन कर रहे हैं. किसान हारेगा तो सरकार हारेगी और किसान जीतेगा तो सरकार जीतेगी।
● 30 दिसंबर को कुंडली-मानेसर-पलवल
हाइवे पर ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे किसान
किसान यूनियन के नेता दर्शन पाल ने कहा कि कृषि कानूनों के विरोध में 30 दिसंबर को किसान कुंडली-मानेसर-पलवल हाइवे पर ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे. इसके साथ ही उन्होंन लोगों से किसानों के बीच आकर नया साल मनाने की अपील भी की है, उन्होंने कहा, “हम दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों के लोगों से अनुरोध करते हैं कि वे प्रदर्शनकारी किसानों के साथ नए साल का जश्न मनाएं।