खबरवाणी EXCLUSIVE : अंतरराष्ट्रीय बाल मजदूरी निषेध दिवस पर पीड़ा सुनाते बाल मजदूर

खबरवाणी संवाददाता
ग़ाज़ियाबाद : देश को आजाद हुए 71 साल से भी ज्यादा हो गए लेकिन ये मासूम से चेहरे आज भी आजाद नहीं हुए, कंधे पर घर की जिम्मेदारी का बोझ है। लिहाजा ये मासूम नन्हे बालक आज भी अपने ही देश में बचपन कैद कर, घर की जीविका चलाने को मजबूर है। जिस उम्र के पढ़ाव में इन्हें आंख मिचौली खेलनी थी, उस ही उम्र के पढ़ाव में कुदरत और किस्मत इनके साथ आंख मिचौली खेल रही है। जिस उम्र में कंधे पर स्कूल के बस्ते होने चाहिए थे। उस उम्र में हाथ में कबाड़े का बौरा लेने पर मजबूर हैं।
तस्वीर शुक्रवार सुबह वसुंधरा सेक्टर 2ए की हैं। इस कबाड़ चुगते हुए बच्चे ने बताया कि घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं है, सुबह से शाम तक घर में दो जून कि रोटी के लिए लाले रहते है। ऐसे में कबाड़ा बेच कर रोज शाम तक 200-300 रूपए से रोजाना घर खर्च चलता है। दूसरी तस्वीर वसुंधरा सेक्टर 5 की है। जहां एक चाय की दुकान पर बच्चा चाय बेच रहा है। इस बच्चे का नाम टिंकू है।
टिंकू ने बताया कि वो सेक्टर 5 की झुग्गियों में रहता है। पिता ठेली चलाते है, घर में टिंकू से बड़ी एक बहन और टिंकू से छोटे तीन भाई है। ऐसे में घर को चलाने की जिम्मेदारी टिंकू के कंधे पर है। इसलिए टिंकू वसुंधरा सेक्टर 5 में चाय बेच कर घर का खर्च चलाता है। टिंकू ने बताया कि दोपहर दो बजे तक चाय की दुकान चलता है। उसके बाद वसुंधरा स्थित लालबहादुर शास्त्री स्कूल के कक्षा 4 में पढ़ने जाता है। टिंकू की उम्र 14 साल से कम है। जब हमने टिंकू और कबाड़ा उठाने वाले बच्चे से पूछा कि आज 12 जून, अंतरराष्ट्रीय बाल मजदूरी निषेध हैं। दोनों बच्चों ने बिना देरी किए हुए तपाक से जवाब दिया कि अगर हम काम छोड़ देंगे तो हमारे घर का खर्च कैसे चलेगा।
● 12 जून को देशभर में बनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय बाल मजदूरी निषेध दिवस
साल 2002 में अंतरराष्ट्रीय श्रम संघ द्वारा 12 जून को अंतरराष्ट्रीय बाल मजदूरी निषेध दिवस की शुरुआत की गई। उसके बाद से हर साल 12 जून को देशभर में बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाने लगा। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से श्रम न कराकर उन्हें शिक्षा दिलाने के लिए जागरूक करना है। साल 2002 में सर्वसम्मति से पास हुए इस कानून के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से श्रम कराने को अपराध माना गया हैं। 1986 में पहली बालश्रम निषेध और नियमन अधिनियम पास किया गया था। इस अधिनियम के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से श्रम कराना गैर-क़ानूनी करार दिया गया था। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत बच्चों को उद्योग और कारखानों में काम करने की अनुमति नहीं है। जबकि धारा 45 के अंतर्गत देश के सभी राज्यों को 14 साल से कम उम्र के बच्चों को मुफ़्त शिक्षा देना अनिवार्य किया गया है।